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"2 शुभ संयोग मे कल 23 अक्टूबर शुक्रवार को रखा जाएगा अक्टूबर माह का अंतिम प्रदोष व्रत" -
अक्टूबर का अंतिम प्रदोष व्रत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को है. यह प्रदोष आश्विन का भी अंतिम प्रदोष होगा क्योंकि शुक्ल पक्ष में पड़ रहा है. प्रदोष के दिन व्रत रखकर देवों के देव महादेव की पूजा करते हैं. प्रदोष व्रत करने से हर प्रकार के दोषों से मुक्ति मिल जाती है. भगवान शिव की कृपा से हर शुभ मनोकामनाओं की पूर्ति हो जाती है. इस बार के प्रदोष व्रत पर रवि योग बन रहा है, लेकिन पूरे दिन पंचक रहेगा. वहीं शिव पूजा के लिए भक्तों को ढाई घंटे का शुभ मुहूर्त प्राप्त होगा.
पंचांग के आधार पर देखा जाए तो इस बार आश्विन शुक्ल त्रयोदशी तिथि 23 अक्टूबर को दोपहर में 2 बजकर 35 मिनट पर शुरू हो रही है. यह तिथि अगले दिन 24 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 36 मिनट तक रहेगी.
उदयातिथि के आधार पर त्रयोदशी तिथि 24 अक्टूबर शनिवार को है, लेकिन उस दिन दोपहर में यह तिथि खत्म हो रही है तो प्रदोष काल नहीं मिल रहा है. ऐसे में त्रयोदशी तिथि का प्रदोष काल 23 अक्टूबर को मिल रहा है, तो -
"प्रदोष व्रत कल 23 अक्टूबर शुक्रवार को रखा जाएगा. यह शुक्र प्रदोष व्रत है".
शुक्र प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त -
इस बार के शुक्र प्रदोष पर शिव पूजा के लिए 2 घंटे 33 मिनट का शुभ मुहूर्त है. जो लोग व्रत रखेंगे या जो नहीं भी रखेंगे, लेकिन प्रदोष पूजा करना चाहते हैं तो वे शाम को 5 बजकर 44 मिनट से रात 8 बजकर 16 मिनट के बीच कर सकते हैं.
02 शुभ योग में शुक्र प्रदोष व्रत -
इस बार के शुक्र प्रदोष व्रत के दिन 2 शुभ योगों का निर्माण हो रहा है. प्रदोष वाले दिन प्रात:काल से ही ध्रुव योग बन रहा है, जो रात में 10 बजकर 08 मिनट तक रहेगा. इस योग में कोई भी स्थाई कार्य करना शुभ फलदायी होता है.
प्रदोष की रात 9 बजकर 2 मिनट से रवि योग बन रहा है, जो अगले दिन 24 अक्टूबर, शनिवार को सुबह 6 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. सूर्य के प्रभाव वाले इस योग में सभी दोष खत्म हो जाते हैं.
व्रत वाले दिन पूर्व भाद्रपद नक्षत्र है, जो प्रात:काल से लेकर रात 09 बजकर 02 मिनट तक रहेगा. उसके बाद से उत्तर भाद्रपद नक्षत्र है.
कैलाश और नंदी पर शिववास -
प्रदोष वाले दिन शिव जी का वास कैलाश और उनके प्रिय सेवक नंदी पर है. कैलाश पर शिववास प्रात:काल से लेकर दोहपर 02 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, उसके बाद उनका वास नंदी पर होगा. इस दिन जो लोग रुद्राभिषेक कराना चाहते हैं, वे करा सकते हैं. यह आपके लिए शुभ फलदायी होगा.
शुक्र प्रदोष व्रत पूजा विधि -
- प्रदोष व्रत के दिन व्रती को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। यह कार्य सूर्योदय से पहले करना उत्तम माना जाता है।
- नित्य कर्म करने के बाद पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें वहां एक लकड़ी की चौकी पर लाल अथवा पीले रंग का वस्त्र बिछाएं। फिर, चौकी पर महादेव और मां पार्वती प्रतिमा स्थापित करें।
- चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करें और मन ही मन शिवजी का स्मरण करते हुए शुक्र प्रदोष व्रत करने का संकल्प करें। इसके बाद, भगवान शिव और माता पार्वती को ताजे फूल-माला आदि अर्पित करें।
- धूप और घी का दीपक जलाने के बाद विधि-पूर्वक भगवान की पूजा-आरती करें। इसके बाद, पूरे दिन विधिपूर्वक और नियमानुसार प्रदोष व्रत रखें।
- प्रदोष काल में स्वच्छ होकर घर के पास वाले शिवालय या अपने मंदिर में ही भगवान शिव का दूध, दही, शक्कर, शहद और घी से अभिषेक करें।
- भगवान शिव को इस दिन बेलपत्र जरूर अर्पित करने चाहिए। साथ ही, माता पार्वती को श्रृंगार का सामान भेंट करें। फिर, पुष्प, धूप-दीप आदि अर्पित करें।
- भोलेनाथ के मंत्रों का जप करें और फिर, शुक्र प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। इसके बाद, अंत में विधि-विधान से शिवजी और माता पार्वती की पूजा आरती करें।
जानिए प्रदोष व्रत करने के फायदे -
1. धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल पर महादेव की पूजा करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं और साधक को जाने-अनजाने में हुए सभी पापों से मुक्ति मिलती है हैं। शिव साधना तनाव और नकारात्मक विचार को दूर कर मानसिक शांति दिलाती है।
2. त्रयोदशी तिथि का संबंध चंद्रमा से बताया जाता है। इस तिथि पर व्रत रखने से शरीर में चंद्र तत्व में सुधार होता है। इस दिन अन्न त्याग कर मात्र फलाहार ही ग्रहण करने वाले व्यक्ति का चंद्र कितना भी खराब क्यों न हो वह सुधरने लगता है।
3. चंद्रमा की स्थिति का प्रत्येक व्यक्ति पर असर पड़ता ही पड़ता है। चंद्र ग्रह की खराब या अच्छी स्थिति व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रभावित करती है। ऐसे में पूरे विधि-विधान से प्रदोष रखने पर चंद्रमा के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।
4. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रह की स्थिति सुधरने से व्यक्ति का शुक्र भी मजबूत होता और शुक्र की स्थिति बेहतर होने से बुध ग्रह भी सुधरता है। इस तरह प्रदोष व्रत करने से 3 ग्रहों का शुभ फल मिलना लगता है। चंद्रमा मजबीत होने से धन-समृद्धि बढ़ती है, शुक्र से प्रेम, सुख और ऐश्वर्य बढ़ता है। वहीं, बुध से नौकरी और कारोबार में लाभ मिलने लगता है।
5. मान्यता है कि प्रदोष व्रत का सकारात्मक असर साधन के शरीर और मन दोनों पर पड़ता है। ऐसे में इस व्रत का शुभ प्रभाव आपके अशुभ संस्कारों को भी खत्म कर सकता है।
ज्योतिषाचार्य पं. प्रवेश रंजन शर्मा जी
(जन्म कुंडली, अंक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ)
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