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"शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन होगी मां स्कंदमाता की पूजा, जानिए पूजा विधि, भोग और मंत्र" -
हिंदू पंचांग के अनुसार, कल 15 अक्टूबर को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के साथ शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन है। इस दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना किया जएगा। स्कंद माता के बारे में मार्कण्डेय पुराण में बताया गया है। उनके स्वरूप की बात करें, तो माता ने अपनी गोद में स्कंद को धारण किया हुआ था। उन्हें मातृत्व, करुणा और संतान के कल्याण का प्रतीक माना जाता है। सिंहासन में विराजमान और कमल धारण करने वाली यशस्विनी मां स्कंदमाता सदैव कल्याण करती है।
- कैसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप -
मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की बात करें, तो उनका स्वरूप काफी मनमोहक है। उनकी चार भुजाएं हैं। जिसमें दो में कमल, एक हाथ अक्षय मुद्रा और एक हाथ से उन्होंने अपने पुत्र स्कंद यानी कार्तिकेय को पकड़ा हुआ है। मां का वाहन सिंह है।
मां स्कंदमाता की पूजा के शुभ मुहूर्त -
- अमृत काल – रात 08:58 बजे से रात 10:45 बजे तक।
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:51 बजे से सुबह 05:39 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक।
मां स्कंदमाता पूजा विधि -
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद अगर कलश स्थापना किया है, तो सबसे पहले उसकी पूजा करें। विधिवत पूजा करने के बाद मां दुर्गा के साथ-साथ माता स्कंदमाता की पूजा करें। उन्हें फूल, माला, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत, वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद भोग में केला, मिठाई खिलाने के साथ बीड़े का भोग अर्पित करें। फिर घी का दीपक और धूप जलाकर मां दुर्गा चालीसा, स्कंदमाता मंत्र के साथ दुर्गा सप्तशती पाठ, स्कंदमाता मंत्र, स्तोत्र करने के बाद अंत में आरती कर लें। इसके साथ ही भूलचूक के लिए क्षमा मांग लें।
- स्कंदमाता का भोग -
मां स्कंदमाता को पीले रंग के भोग अति पसंद है। इसलिए उन्हें केला, बेसन के लड्डू, केसर की खीर या फिर कोई अन्य पीली मिठाई, फल आदि अर्पित कर सकते हैं।
- मां स्कंदमाता का प्रिय फूल -
मां स्कंदमाता के प्रिय फूल कमल है। अगर कमल संभव न हो, तो गुलाब या फिर कोई फूल अर्पित कर सकते हैं।
- मूल मंत्र
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः
- स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
ज्योतिषाचार्य पं. प्रवेश रंजन शर्मा जी
(जन्म कुंडली, अंक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ)
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