"श्राद्ध पक्ष में दशमी के श्राद्ध का महत्व, जानिए कैसे और किसका करते हैं श्राद्ध" -
दशमी तिथि की शुरुआत : 05 अक्टूबर को तड़के 03:53 बजे
दशमी तिथि का समापन: 06 अक्टूबर को तड़के 02:07 बजे
पितृ पक्ष में दशमी श्राद्ध का अपना एक विशेष और पावन महत्व है। यह तिथि उन सभी पितरों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए समर्पित है, जिनका देहावसान किसी भी माह के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हुआ हो।
"वर्ष 2026 में दशमी श्राद्ध सोमवार, कल 05 अक्टूबर को मनाया जाएगा।"
कुतुप मुहूर्त : दोपहर 11:46 से 12:33 बजे तक (अवधि: 47 मिनट)
रौहिण मुहूर्त : दोपहर 12:33 से 01:20 बजे तक (अवधि: 47 मिनट)
अपराह्न काल : दोपहर 01:20 से शाम 03:41 बजे तक
अश्वमेध यज्ञ तुल्य फल : मान्यता है कि दशमी के दिन किसी पवित्र कूप (कुएं) के समीप पिंडदान करने से साधक को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है।
ज्योतिषाचार्य पं. प्रवेश रंजन शर्मा जी
(जन्म कुंडली, अंक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ)
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