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"Pitru Paksha Special Report : अगर किसी की मौत हो जाए तो उसका पहला श्राद्ध कब करना चाहिए ? यहां दूर कर लें कफ्यूजन"
"इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत कल 26 सितंबर 2026 से हो रही है".
तिथियों के कम या ज्यादा होने पर इसके दिन घट या बढ़ जाते हैं. इस बार पितृ पक्ष 15 दिन चलेंगे. इस दौरान लोग अपने पितरों को याद कर तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, दान, ब्राह्मण भोज, पंचबलि आदि करते हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से पितर खुश होते हैं और तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं. लेकिन, तर्पण को लेकर लोगों में कुछ ऐसी भी भ्रांतियां होती हैं, जिसके चक्कर में लोग गलती कर बैठते हैं.
ऐसी ही एक भ्रांति है कि घर में किसी की मौत हो जाए तो वह पहली श्राद्ध कब करें ? क्या पूर्णिमा पर श्राद्ध कर सकते हैं ? वरसी के बाद श्राद्ध करना कितना सही ?
- मृतक का पहला श्राद्ध कब करें ?
सही जानकारी न होने की वजह से कुछ लोग स्वजन की मृत्यु के पश्चात प्रथम वर्ष में श्राद्ध कर देते हैं तो कुछ कभी भी नहीं करते. कई ऐसे भी लोग हैं जो तीसरे वर्ष में श्राद्ध करते हैं. लेकिन, ऐसा करना गलत है.
"ज्योतिषाचार्य पं. प्रवेश रंजन शर्मा जी के मुताबिक, श्राद्ध कभी भी पूर्णिमा पर नहीं, बल्कि तीसरे वर्ष (3rd Year) में मृतक की पुण्यतिथि पर श्राद्ध करना अधिक शास्त्रोक्त है".
- मृत्यु तिथि तथा पितृ पक्ष में श्राद्ध करना कितना सही ?
सनातन परंपरा में मृत्यु तिथि तथा पितृ पक्ष में श्राद्ध करना आवश्यक है. श्राद्ध से केवल अपनी तथा अपने पितरों की ही संतृप्ति नहीं होती, अपितु जो व्यक्ति इस प्रकार विधिपूर्वक अपने धन के अनुरूप श्राद्ध करता है, वह ब्रह्मा से लेकर घास तक समस्त प्राणियों को संतृप्त कर देता है. पितृ पक्ष में मृत व्यक्ति की जो तिथि आए, उस तिथि पर मुख्य रूप से पावर्ण, महालया श्राद्ध करने का विधान है. किसी का भी श्राद्ध आरंभ में पूर्णिमा तिथि से करना पूर्णतया गलत है.
- तो फिर पूर्णिमा के दिन किसका श्राद्ध होता है?
पूर्णिमा के दिन सिर्फ उसी व्यक्ति का श्राद्ध होता है जिसकी मृत्यु पूर्णिमा तिथि को हुई हो। इसे पूर्णिमा का श्राद्ध या ऋषियों का श्राद्ध भी कहते हैं।
- लोग गलती क्या करते हैं?
बहुत से पंडित या परिवार इस डर से कि "कहीं कोई तिथि छूट न जाए" या "शुभारंभ पूर्णिमा से कर दें" तो पितरों को ज्यादा मिलेगा, वो पहले दिन से ही अपने सभी पितरों का श्राद्ध पूर्णिमा को कर देते हैं। ये शास्त्र के अनुसार पूर्णतया गलत है।
पूर्णिमा को सिर्फ उसी का होगा जिसकी मृत्यु पूर्णिमा को हुई है। पूर्णिमा पितृपक्ष का गेट है, घर नहीं। अगर आप सबका श्राद्ध पूर्णिमा से ही शुरू कर दोगे, तो जिस तिथि के पितर हैं, उन तक भोजन और जल ठीक समय पर नहीं पहुँचता। इसलिए उनका अतृप्त रहना माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य पं. प्रवेश रंजन शर्मा जी
(जन्म कुंडली, अंक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ)
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