Astroworld With Pravesh
"श्राद्ध पक्ष में चतुर्दशी के श्राद्ध का महत्व, जानिए कैसे और किसका करते हैं श्राद्ध"
चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ : 08 अक्टूबर को रात 10:15 बजे से
चतुर्दशी तिथि का समापन : 09 अक्टूबर को रात 09:35 बजे तक
पितृ पक्ष की चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध (जिसे 'घात चतुर्दशी' या 'शस्त्र हत श्राद्ध' भी कहा जाता है) अत्यंत विशेष और संवेदनशील माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, यह तिथि केवल उन्हीं पूर्वजों के निमित्त समर्पित होती है जिनकी मृत्यु किसी अस्त्र-शस्त्र, दुर्घटना, ज़हर, अग्नि, आत्महत्या या किसी अन्य प्रकार की हिंसा व अकाल घटना के कारण हुई हो। सामान्य या स्वाभाविक रूप से देह त्यागने वाले पितरों का श्राद्ध इस दिन वर्जित होता है।
"वर्ष 2026 में चतुर्दशी का श्राद्ध कल 09 अक्टूबर, शुक्रवार को रखा जाएगा।"
श्राद्ध कर्म के मुख्य मुहूर्त :-
- कुतुप मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय) : दोपहर 11:45 से 12:31 बजे तक
- रोहिणी मुहूर्त : दोपहर 12:31 से 01:18 बजे तक
- अपराह्न काल : दोपहर 01:18 से 03:38 बजे तक
ज्योतिषाचार्य पं. प्रवेश रंजन शर्मा जी
(जन्म कुंडली, अंक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ)
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