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"श्राद्ध पक्ष में त्रयोदशी के श्राद्ध का महत्व, जानिए कैसे और किसका करते हैं श्राद्ध"
- त्रयोदशी तिथि की शुरुआत : 07 अक्टूबर को रात 23:16 बजे से
- त्रयोदशी तिथि का समापन : 08 अक्टूबर को रात 22:15 बजे तक
पितृ पक्ष में त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध अत्यंत संवेदनशील और विशेष फलदायी माना गया है। यह तिथि मुख्य रूप से उन पूर्वजों को समर्पित होती है, जिनकी मृत्यु त्रयोदशी तिथि को हुई हो या फिर जिनकी जीवन-यात्रा किसी दुर्घटना, अकाल मृत्यु, आत्महत्या या किसी अप्रत्याशित कारण से असमय समाप्त हो गई हो। मान्यता है कि इस पावन दिन विधि-विधान से किया गया तर्पण अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पितरों की आत्मा को भटकने से रोकता है और उन्हें परम शांति प्रदान करता है।
साल 2026 में त्रयोदशी का श्राद्ध कल 08 अक्टूबर, बृहस्पतिवार को रखा जाएगा।
श्राद्ध कर्म के विशेष मुहूर्त :-
- कुतुप मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय) : दोपहर 11:45 से 12:32 बजे तक
- रोहिणी मुहूर्त : दोपहर 12:32 से 01:19 बजे तक
- अपराह्न काल (मुख्य समय) : दोपहर 01:19 से 03:39 बजे तक
महत्व : त्रयोदशी तिथि का निष्ठापूर्वक किया गया यह तर्पण अकाल काल-कवलित हुए पितरों की आत्मा को सद्गति और मोक्ष प्रदान करता है, जिससे प्रसन्न होकर पितृ अपने वंशजों को सुख, समृद्धि और सुरक्षा का वरदान देते हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. प्रवेश रंजन शर्मा जी
(जन्म कुंडली, अंक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ)
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