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"Indira Ekadashi 2026 Date : पितरों को मुक्ति दिलाने वाला एकादशी व्रत कब ? नोट करें सही तिथि, पूजा मुहूर्त और पारण का समय" -
अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को धार्मिक परंपरा में 'इंदिरा एकादशी' कहा जाता है. यह एकादशी पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) के दौरान आती है, जिसके कारण सनातन परंपरा में इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखकर भगवान शालिग्राम और भगवान विष्णु की पूजा करने तथा उसका पुण्य पितरों को समर्पित करने से पूर्वजों को सद्गति प्राप्त होती है.
इंदिरा एकादशी 2026 : तिथि और शुभ मुहूर्त -
अश्विन कृष्ण एकादशी तिथि प्रारंभ : 05 अक्टूबर को देर रात 02:07 AM से
अश्विन कृष्ण एकादशी तिथि समाप्त : 06 अक्टूबर को देर रात 12:34 AM तक
शास्त्रों के अनुसार, उदयातिथि में जब कोई तिथि लगती है, तो उसी दिन व्रत किया जाता है.
"व्रत का दिन : इंदिरा एकादशी का व्रत कल 06अक्टूबर मंगलवार को रखा जाएगा".
इंदिरा एकादशी 2026 पारण समय -
इंदिरा एकादशी व्रत का पारण 7 अक्टूबर बुधवार को किया जाएगा. पारण का समय सुबह 6:17 AM से लेकर सुबह 8:38 AM तक है. उस दिन द्वादशी तिथि का समापन दोपहर 11:16 AM होगा.
इंदिरा एकादशी 2026 मुहूर्त -
इंदिरा एकादशी व्रत पर भगवान विष्णु की पूजा आज सुबह में सूर्योदय के बाद से कर सकते हैं. उस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:39 AM से 05:28 AM तक है. इस समय में स्नान आदि से निवृत होकर व्रत और पूजा का संकल्प करें. फिर विधिपूर्वक श्रीहरि की पूजा करें.
एकादशी की पूजा लाभ-उन्नति मुहूर्त 10:41 AM से 12:09 PM के बीच करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं. इससे पूर्व चर-सामान्य मुहूर्त 09:13 AM से 10:41 AM तक है, वहीं अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त दोपहर में 12:09 PM से 01:37 PM तक रहेगा. एकादशी का अभिजीत मुहूर्त 11:46 AM से लेकर दोपहर 12:33 PM तक है. यह दिन का शुभ समय है. कोई काम करना हो तो यह समय भी अच्छा रहेगा.
इंदिरा एकादशी पर बनेंगे 4 शुभ योग -
6 अक्टूबर को इंदिरा एकादशी के दिन कुल चार शुभ योगों का संयोग बन रहा है. इनमें सर्वार्थ सिद्धि योग, सिद्ध योग, साध्य योग और शुभ योग शामिल हैं.
सर्वार्थ सिद्धि योग : सुबह 06:17 बजे से रात 10:17 बजे तक रहेगा.
सिद्ध योग : प्रातःकाल से शुरू होकर सुबह 07:20 बजे तक रहेगा.
साध्य योग : सुबह 07:20 बजे के बाद शुरू होगा और 7 अक्टूबर को सुबह 05:00 बजे तक रहेगा.
शुभ योग : साध्य योग के समाप्त होने के बाद शुरू होगा और व्रत के समापन/पारण तक रहेगा.
इन शुभ योगों के संयोग में भगवान विष्णु की पूजा और पितरों के निमित्त किए जाने वाले धार्मिक कार्यों को विशेष फलदायी माना जाता है।
इंदिरा एकादशी महत्व -
ये व्रत मुख्य रूप से पितरों को अधोगति (नर्क या कष्टपूर्ण योनियों) से मुक्ति दिलाने और उन्हें मोक्ष प्रदान करने के लिए किया जाता है. इस व्रत के प्रभाव से परिवार का पितृ दोष समाप्त होता है और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है. व्रती के स्वयं के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत में विष्णु लोक की प्राप्ति होती है. शास्त्रों के अनुसार, इस एकादशी की कथा सुनने या व्रत करने मात्र से वाजपेय यज्ञ या अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है.
ज्योतिषाचार्य पं. प्रवेश रंजन शर्मा जी
(जन्म कुंडली, अंक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ)
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