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"03 शुभ संयोग मे कल 22 अक्टूबर गुरुवार को रखा जाएगा पापांकुशा एकादशी व्रत" -
सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है. इनमें आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी को अत्यंत फलदायी माना गया है. यह दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की आराधना के लिए समर्पित है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से व्रत और पूजन करने से साधक के जाने-अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
पंचांग की गणना के अनुसार, पापांकुशा एकादशी की तिथि का आरंभ 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 02:11 बजे से हो जाएगा. इसके बाद यह तिथि अगले दिन यानी 22 अक्टूबर 2026 को दोपहर 02:47 बजे तक मान्य रहेगी.
उदयातिथि और शास्त्रीय नियमों को ध्यान में रखते हुए - "एकादशी व्रत कल 22 अक्टूबर दिन गुरुवार को ही रखा जाएगा".
- पापांकुशा एकादशी मुहूर्त 2026 -
पापांकुशा एकादशी के दिन का शुभ समय अभिजीत मुहूर्त 11:43 AM से दोपहर 12:28 PM तक है. उससे पहले ब्रह्म मुहूर्त 4:45 AM से 5:35 AM तक है. इसमें स्नान आदि करके व्रत और पूजा का संकल्प लें.
विष्णु पूजा के लिए शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह में 6:26 AM से सुबह 7:51 AM तक है. जो लोग किसी वजह से इस समय पूजा न कर पाएं, वे उसके बाद कर सकते हैं. इस दिन का विजय मुहूर्त दोपहर में 01:58 PM से 02:44 PM तक रहेगा, वहीं अमृत काल दोपहर 01:18 PM से दोपहर 02:58 PM तक है.
- पापांकुशा एकादशी का पारण -
जो लोग पापांकुशा एकादशी का व्रत रखेंगे, वे व्रत का पारण 23 अक्टूबर शुक्रवार को सुबह में 6:27 बजे से सुबह 8:42 बजे के बीच कभी भी कर सकते हैं.
3 शुभ संयोग में पापांकुशा एकादशी -
इस साल की पापांकुशा एकादशी पर 3 शुभ संयोगों का निर्माण हो रहा है -
- पहला यह कि पापांकुशा एकादशी का व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है, जो दिन स्वयं भगवान विष्णु की पूजा के लिए निर्धारित है. उस दिन की एकादशी और भी पुण्य फलदायी है. विष्णु पूजा का आपको दोगुना लाफ प्राप्त होगा.
- पापांकुशा एकादशी पर वृद्धि और ध्रुव योग बन रहे हैं. ये दोनों ही शुभ होते हैं. उस दिन ध्रुव योग प्रात:काल से लेकर रात 11 बजकर 40 मिनट तक है, उसके बाद से ध्रुव योग प्रारंभ होगा, जो अगले दिन पारण के बाद तक रहेगा.
- इसके अलावा एकादशी के दिन शतभिषा नक्षत्र है, जो प्रात:काल से लेकर रात 8 बजकर 49 मिनट तक है.
पापांकुशा एकादशी की पूजा विधि -
- सुबह का स्नान और संकल्प : एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें.
- पूजा स्थल की सफाई : घर के मंदिर की अच्छी तरह सफाई करके वहां एक चौकी रखें और उस पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
- पूजन सामग्री अर्पित करें : भगवान विष्णु को पीले फूल, वस्त्र, तुलसी दल, ऋतुफल और नैवेद्य अर्पित करें. एकादशी की पूजा में तुलसी का होना बहुत जरूरी माना जाता है.
- भोग और आरती : भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं. इसके बाद धूप-दीप जलाकर श्री हरि की आरती करें और विष्णु सहस्त्रनाम या मंत्रों का जाप करें.
- व्रत कथा और रात्रि जागरण : दिनभर उपवास रखें और कथा सुनें या पढ़ें. संभव हो तो रात्रि में भगवान का भजन-कीर्तन करें और जागरण करें.
- दान और पारण : द्वादशी तिथि को सुबह स्नान करने के बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन और दान दें, उसके बाद ही अपना व्रत खोलें.
तुलसी पूजन का महत्व -
तुलसी को भगवान विष्णु की अति प्रिय माना जाता है, इसलिए इन्हें ‘विष्णुप्रिया’ भी कहते हैं. एकादशी के दिन तुलसी पूजन से घर के समस्त क्लेश दूर होते हैं और सुख-शांति आती है. शाम के समय तुलसी के पौधे के पास गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं और सात अथवा ग्यारह बार परिक्रमा करें.
इन प्रभावशाली मंत्रों का करें जाप -
- ॐ नमोः नारायणाय नमः.
- ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः
- ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
ज्योतिषाचार्य पं. प्रवेश रंजन शर्मा जी
(जन्म कुंडली, अंक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ)
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