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"इंदिरा एकादशी कल 06 अक्टूबर विशेष"
बेहद महत्वपूर्ण है पितृपक्ष की एकादशी का श्राद्ध, ब्राह्मण भोज में इन बातों का रखें ध्यान, पिशाच योनि में पड़े पितरों को मिलती है मुक्ति -
इंदिरा एकादशी 2026 -
एकादशी तिथि की शुरुआत : 6 अक्टूबर दिन मंगलवार, सुबह 2 बजकर 7 मिनट से
एकादशी तिथि का समापन : 7 अक्टूबर दिन बुधवार, सुबह 00 बजकर 34 मिनट तक
"पितृपक्ष की इंदिरा एकादशी का व्रत और एकादशी तिथि का श्राद्ध कर्म कल 6 अक्टूबर दिन मंगलवार को किया जाएगा".
पितृपक्ष की एकादशी पर श्राद्ध कर्म का मुहूर्त -
कुतुप मुहूर्त : दोपहर 11:46 से 12:33 बजे तक
रौहिण मुहूर्त : दोपहर 12:33 से 01:20 बजे तक
अपराह्न काल : दोपहर 01:20 से शाम 03:40 बजे तक
पितृपक्ष की एकादशी का महत्व -
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इंदिरा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है. कहा जाता है कि इस व्रत का पुण्य पितरों को अर्पित करने से उन्हें सद्गति प्राप्त होती है. जो पितर किसी कारणवश निम्न योनि में चले गए हों या यमलोक में कष्ट भोग रहे हों, उनके लिए भी इंदिरा एकादशी का व्रत और श्राद्ध कर्म विशेष लाभकारी माना गया है. इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-पाठ करने से परिवार पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है.
एकादशी श्राद्ध में इन बातों का रखें ध्यान -
इंदिरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें.
घर के पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की पूजा करें.
पितरों का स्मरण कर उनके निमित्त तर्पण और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है.
श्राद्ध कर्म में श्रद्धा और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
पितरों के लिए किए जाने वाले कर्म में सात्विक भोजन का प्रयोग करें और सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण भोजन या जरूरतमंदों को भोजन कराएं.
इस दिन किसी का अपमान या अनादर करने से बचना चाहिए.
श्राद्ध की प्रकिया पूरी हो जाने के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार पितरों के नाम का दान करें.
पितरों को मिलता है मोक्ष का मार्ग -
मान्यता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और पितरों के लिए मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है. पितृपक्ष में पड़ने के कारण इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है. इसलिए कल 6 अक्टूबर को श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा के साथ अपने पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें और दान-पुण्य करें.
ज्योतिषाचार्य पं. प्रवेश रंजन शर्मा जी
(जन्म कुंडली, अंक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ)
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