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"Masik Shivratri October 2026 Date : मासिक शिवरात्रि कब है ? निशिता मुहूर्त से तय होगी तारीख, लेकिन उस दिन नहीं होगा चतुर्दशी का श्राद्ध, जानें क्यों ?
अक्टूबर की मासिक शिवरात्रि आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाएगी. लेकिन आपको जानकर हैरानी हो सकती है, उस दिन चतुर्दशी का श्राद्ध नहीं होगा. वह अगले दिन होगा. इसके पीछे शिवरात्रि का मुहूर्त सबसे बड़ा कारण है. शिवरात्रि की तारीख का निर्धारण निशिता मुहूर्त के आधार पर होती है, जबकि चतुर्दशी श्राद्ध की तारीख उदयातिथि के आधार पर तय होती है.
मासिक शिवरात्रि अक्टूबर 2026 तारीख -
पंचांग के अनुसार, देखा जाए तो मासिक शिवरात्रि के लिए आश्विन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर को रात में 10 बजकर 15 मिनट से शुरू होगी और यह 9 अक्टूबर को रात 9 बजकर 35 मिनट तक मान्य रहेगी.
निशिता मुहूर्त के आधार पर मासिक शिवरात्रि का व्रत कल 08 अक्टूबर गुरुवार को रखना सही रहेगा, न कि 09 अक्टूबर शुक्रवार को.
मासिक शिवरात्रि अक्टूबर 2026 मुहूर्त -
अक्टूबर की मासिक शिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:39 AM से 05:28 AM तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:45 AM से दोपहर 12:32 PM तक है. शिव पूजा के लिए निशिता मुहूर्त रात 11:44 PM से लेकर देर रात 12:33 AM तक रहेगा. इस मुहूर्त में मंत्र साधना करते हैं. वैसे आप दिन में ब्रह्म मुहूर्त से शिव जी का जलाभिषेक करके कभी भी पूजा कर सकते हैं. शिव पूजा में राहुकाल, भद्रा आदि का दोष नहीं लिया जाता है.
"8 नहीं, 9 अक्टूबर को होगा चतुर्दशी श्राद्ध -
मासिक शिवरात्रि कल 8 अक्टूबर को मनाई जाएगी, जबकि चतुर्दशी श्राद्ध 9 अक्टूबर को होगा. इसकी वजह चतुर्दशी की उदयातिथि है. 9 अक्टूबर को सूर्योदय 06:18 AM पर होगा, उस समय चतुर्दशी तिथि प्राप्त होगी.
जैसा कि आपको पता है कि श्राद्ध और तर्पण कुतुप मुहूर्त या रौहिण मुहूर्त में करते हैं, जो दिन के समय होता है. 8 अक्टूबर को चतुर्दशी रात में लगेगी, तो ये दोनों मुहूर्त प्राप्त नहीं होंगे".
चतुर्दशी श्राद्ध 2026 मुहूर्त -
चतुर्दशी श्राद्ध के लिए तर्पण और श्राद्ध का कुतुप मूहूर्त 11:45 AM से लेकर दोपहर 12:31 PM तक है. वहीं रौहिण मूहूर्त दोपहर में 12:31 PM से लेकर 01:18 PM तक रहेगा. इन दोनों मुहूर्त में आपको अपने पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान, दान, ब्राह्मण भोज और पंचबलि कर्म कर देना चाहिए. अपराह्न काल दोपहर 01:18 PM से लेकर दोपहर 03:38 PM तक रहेगा.
चतुर्दशी श्राद्ध का महत्व -
- चतुर्दशी श्राद्ध के दिन उन पितरों का श्राद्ध कर्म होता है, जिनका निधन किसी भी महीने की चतुर्दशी तिथि को हुआ हो.
- इसके अलावा जिन पितरों की अकाल मृत्यु हुई होती है, उनका श्राद्ध कर्म भी चतुर्दशी के दिन ही करते हैं. चतुर्दशी के प्रतिनिधि देव भगवान शिव शंकर हैं. उनकी कृपा से अकाल मृत्यु वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.
- जो लोग किसी असाध्य रोग, किसी दुर्घटना, आत्महत्या या अन्य कारणों से अपनी आयु पूरी नहीं कर पाते हैं, उनको अकाल मृत्यु प्राप्त होती है.
ज्योतिषाचार्य पं. प्रवेश रंजन शर्मा जी
(जन्म कुंडली, अंक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ)
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